मासूमो की हत्या के सामने 15 अगस्त, जन्माष्टमी की खुशियाँ जायज है : संजीव सिंह - DAINIK JHROKHA

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Wednesday, August 16, 2017

मासूमो की हत्या के सामने 15 अगस्त, जन्माष्टमी की खुशियाँ जायज है : संजीव सिंह





उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में हुए मासूमो की हत्या पर आम आदमी पार्टी के पूर्वांचल सयोयाक संजीव सिंह कहते है क्या हम 15 अगस्त,जन्माष्टमी  के नाम पर मनाये जाने वाली समस्त खुशियों का बहिष्कार कर सकते है।  बिल्कुल ,आजादी कैसे है , किस कठिनाई से मिली यह आजादी हम सभी जानते हैं। लेकिन देश जिस हालात में है,आज हमारे नहीं तो किसी के भी सैकड़ों मासूम बच्चे लोकतांत्रिक सरकार के लापरवाही से मर गये। फिर भी कोई खेद नहीं, कानून व्यवस्था के हालात ये कि "पढ़े बालिका बढे बालिक " से  " बचे बालिका नहीं मरे बालिका " तक आ गयी है। क्या ये उन माताओ के " कान्हा,कृष्ण नहीं थे या अपने बाबा की दुलारी " राधा, रूक्मणी "नहीं थी ? किसानों की आत्महत्या " फैशन "? विधानसभा के सामने योग्य नौजवानों को अपने रोजगार की माँग पर लाठियो से हाथ पैर तोड़ दिया जाता है।





क्या क्या कहूँ ? अगर इस पर भी 15 अगस्त, कृष्णजन्माष्टमी की खुशियाँ मनाये तो तो हम नहीं कर सकते क्योंकि अंतरात्मा स्वीकार नहीं करता । क्या सरकारें अपने अंदर की नैतिकता में झाकेगी ? क्या अपने जिम्मेदारियों का ठीकरा दूसरे के ऊपर डाल सकती है। क्या ये भ्रष्ट सरकार किस समाज का प्रतिनिधित्व करती है ?  या दल के लकदक तक अपनी जवाबदेही समझती है। अवश्य आजादी अधूरी है फिर पूरी आजादी मिले कैसै ? फिर भी चाहते है कि आजादी को अन्य त्योहारों से बढकर  आनन्द खुली हवा में मनाये तो कृपया दल भक्ति तथा नेता भक्ति  से आगे  निकल कर आइये और तीव्र प्रयास करे। क्योंकि आजादी की परिकथा जब पढ़ते है तो झंडे से लेकर राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत तक कभी धर्म या जाति आड़े नहीं  आयी।  इसलिए कि यदि झंडे का स्वरूप किसी मुस्लिम ने बना दिया या राष्ट्रगीत किसी हिन्दू ने लिख दिया तो वह उसके या उसके धर्म/ जाति तक संबंधित नहीं था।इसलिए कि पूरे राष्ट्र ने उसे स्वीकारा इसलिए कि मजहब नही सिखाता हिन्दी है हम हिन्दोसिता हमारा !





 जब हम परराष्ट्र अथवा पाकिस्तान में मासूम बच्चे आतंकवाद का शिकार हो गये थे तो हमने दुश्मन राष्ट्र के बावजूद इंसानियत के लिये शोक संवेदना व्यक्त किया तथा आतंकवाद के साथ साथ उस सरकार को भी आतंकवाद का संरक्षण देने के लिये कोसा तब हम एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक की तरह थे लेकिन जब अपने देश में यह बात आती है तो हम ऐसा समूहगान यहाँ की व्यवस्था या सरकार के लिये क्यों नहीं करते या कब करेंगे  ?जिस दिन यह सवाल हम सब राष्ट्र भावना के साथ सरकारो से करने लगेंगे बगैर पक्षपात के तब समझता हूँ कि हा हम सब  अवश्य एक आजाद भारत के नागरिक है अन्यथा झूठी  आजादी की खुशियाँ मनाये या न मनाये सब स्वतंत्र है। फिर भी आप सबको " स्वतंत्रता दिवस की बधाई "

आपका- संजीव सिंह

पूर्वांचल सयोयाक  
(आम आदमी पार्टी )

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