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| दिल्ली सीएम अरविन्द केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया |
नई दिल्ली : मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया प्रेस कांफ्रेस कर जानकारी दी कि दिल्ली के 449 प्राइवेट स्कुल है जो कोर्ट द्वारा बनाई गयी कमेटी ' अनिल देव कमेटी ' की सिफारिस लागु नहीं कर रही है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि दिल्ली हाई कोर्ट की बनाई समिति की सिफारिश 449 प्राइवेट स्कूल नहीं मान रहे और लगातार नियम का उल्लंघन कर रहे हैं इसलिए सरकार इनको टेकओवर करने को तैयार है। इसी मुद्दे पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा दिल्ली सरकार शिक्षा को अभिन्न अंग मानती है। अब तक दो हिस्सों में शिक्षा ब्यवस्था प्राइवेट और सरकारी स्कूल के रूप थे। प्राइवेट में पैसे वालों के बच्चे पढ़ते थे और सरकारी में ग़रीब लोगों के बच्चे पढ़ते थे। हमने ये गैप कम किया है। हमने सरकारी शिक्षा प्रणाली को अच्छा किया है।
मुख्यमंत्री के साथी उप मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष ने कहा की 4 दिन पहले ही इनको शो काल नोटिस भेज दिया था। 1108 में से 544 ने फीस सही ढंग से नहीं वसूली है। इनमें से 44 स्कूल माइनॉरिटी के हैं। 15 स्कूलों ने पैसे वापस कर दिए हैं और 13 स्कूल बंद हो चुके हैं। इसके बाद 449 स्कूल बचते हैं। इन्हीं स्कूलों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। हलाकि कई प्राइवेट स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होती है। लेकिन अगर हाईकोर्ट और अनिल देव् कमेटी की सिफारिशें नहीं मानते है तो हमे इनके ऊपर कार्यवाही करते हुए इन स्कूलों को टेकओवर करने को मजबूर होना पड़ेगा।
आपको बतादे की दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा बनाई कमेटी अनिल देव् सिंह समिति ने प्राइवेट स्कुल के मनमाने फ़ीस वसूले धनराशि को ब्याज समेत वापस करने और कई स्कूलों को विशेष निरिक्षण करने के आदेश दिया था। जबकि कई स्कुल मन गए थे लेकिन ज्यादातर स्कुल नहीं मने थे।

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