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| अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री दिल्ली |
नई दिल्ली : मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने डेनमार्क में हो रहे C-40 सम्मलेन में अपने वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद कहा कि, आज मैंने डेनमार्क में प्रदूषण पर हो रहे दुनिया भर के 94 शहरों के नगर अध्यक्षों के सम्मेलन को विडीओ के ज़रिए संबोधित किया। मेरा संबोधन हिंदी में था। सम्बोधन के बाद से कई लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि जब मैं अच्छी अंग्रेज़ी बोल लेता हूँ तो मैंने हिंदी में संबोधन क्यों दिया?
मैंने देखा है कि कई लोगों को हिंदी में बात करने में शर्म महसूस होती है। वो लोग अंग्रेज़ी में बात करने में गर्व महसूस करते हैं। ऐसी मानसिकता ठीक नहीं है। भाषा किसी भी देश की संस्कृति एवं पहचान का अहं हिस्सा होती है। यदि हम भारत से प्यार करते हैं तो अपने भारत की भाषाओं से प्यार करना स्वाभाविक होना चाहिए। किसी भी देश की भाषा दुनिया में उस देश की पहचान को मज़बूत करती है।
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जापानी अंतर राष्ट्रीय स्तर पर गर्व से जापानी भाषा में बोलते हैं, चीन वाले चीनी भाषा में बोलते हैं, फ़्रान्स वाले फ़्रेंच में बोलने में गर्व महसूस करते हैं। इनमे कई लोगों को अंग्रेज़ी आती है लेकिन फिर भी वे लोग अपने देश की भाषा में बोलते हैं। फिर हम भारत के लोगों को भी अपनी भारत की भाषा (चाहे भारत की किसी भाषा में बोलें) में बात करने में गर्व होना चाहिए।
इसलिए मैंने तय किया है कि मैं अंतर राष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में ही बोलूँगा। इसका मतलब यह क़तई नहीं कि मैं अंग्रेज़ी के ख़िलाफ़ हूँ। आज के दौर में अंग्रेज़ी के महत्व को मैं समझता हूँ। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अंग्रेज़ी का महत्व बढ़ता जा रहा है। हम स्कूलों में बच्चों को अंग्रेज़ी पढ़ाएँगे और आधुनिक जीवन में सफलता पाने के लिए अंग्रेज़ी में कुशल भी बनायेंगे। लेकिन जब दूसरे देशों के सामने भारत की बात रखनी होगी तो हम गर्व से अपने देश की भाषा में वार्तालाप करेंगे।

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