![]() |
| मनीष सिसोदिया |
नई दिल्ली : वर्तमान की शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को केवल एक बाजारी सामग्री के तौर पर ही देखती है और उसी रूप में उन्हें परीक्षण देती है। यही वजह है कि किसी भी छात्र का संपूर्ण विकास नहीं हो पाता। सही मायने में शिक्षा ही इकलौता जरिया है, जिससे एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण हो सकता है।
उक्त बातें दिल्ली के उप मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने ऐजुकार्निवाल 18 कार्यक्रम के दौरान अपने सम्बोधन में कहीं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में 20 से 22 दिसंबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार को सिसोदिया ने सभागार में उपस्थित विभिन्न राज्यों के स्कूली शिक्षकों, प्रिंसिपल और स्कूल मालिकों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में शिक्षा के महत्व को समझाया।
दिल्ली में केजरीवाल ने किए 25 ऐसे ऐतिहासिक काम जो आपने कभी सपने में भी नहीं सोचे होंगे
वहीं इस मौके पर सिसोदिया ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भ्रष्टाचार बढ़ने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिन इंजीनियर्स को खुद पर भरोसा नहीं है, वही भ्रष्टाचार और रिश्वत लेने में विश्वास रखते हैं। उन्हें खुद और अपनी इंजीनियरिंग पर भरोसा रखना होगा, तभी भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है।
ऐजुकार्निवाल 18 कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए सिसोदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बीते चार सालों में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों में सीखने को लेकर आत्मनिर्भरता बढ़ी है।

No comments:
Post a Comment
Thanks For Visit my site