आम आदमी पार्टी के २० विधायकों को लाभ के पद पर दोसी मानते हुए चुनाव आयोग ने इन सदस्यों की सदस्ता रद्द करने की राष्ट्रपति से अपील कर दिया है।'आप' पार्टी के राज्य सभा सांसद श्री संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली की माननीय हाईकोर्ट ने यह कह दिया था की ये लोग संसदीय सचिव नहीं है तो फिर अब चुनाव आयोग इन 20 विधायकों को लाभ का पद मामले में अयोग्य कैसे घोषित कर सकता है।
आप नेता संजय सिंह ने लखनऊ में 20 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने के चुनाव आयोग के फैसले पर कहा कि आयोग ने जो फैसला किया है वो गलत है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लोकतंत्र की हत्या करने में जुटी है और चुनाव आयोग ने कानून और नियमों को ताख पर रख फैसला दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के तौर पर काम कर रहा है।
साथ ही संजय सिंह ने ये भी कहा कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और निर्देशों को दरकिनार कर शुक्रवार को अपना फैसला सुना दिया। उन्होंने कहा कि फैसले से पहले विधायकों को अपना पक्ष रखने तक का मौका नहीं दिया गया। ये 20 विधायकों के साथ सरासर अन्याय किया जा रहा है।
राज्यसभा सांसद श्री सिंह ने चुनाव आयोग के फैसले को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठाया और कहा मोदी जी के शासन काल में सभी संबैधानिक संस्था पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। अन्य राज्यों में जहां भी संसदीय सचिव बनाये गए वहाँ उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया और सभी सुविधाएं दी गईं, दिल्ली में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, फिर भी हमारे साथ भेदभाव किया जा रहा है।
साथही विपक्ष को भी जबाब देते हुए कहा कि यदि मनोज तिवारी जी को इस्तीफ़ा माँगना ही है तो पहले प्रधानमंत्री जी का इस्तीफा मांगे क्योंकि सबसे पहले गुजरात में उनके समय में ही संसदीय सचिव बनाये गए जिन्हें उप-मंत्री का दर्जा दिया गया और सारी सुविधाएं दी गईं। कांग्रेस का इतिहास आपातकाल का रहा है, ये BJP के साथ मिलकर दिल्ली सरकार को रोकना चाहते हैं।
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने खा कि जो लोग व्यवस्था के खिलाफ लड़ेंगे, माफिया तंत्र के खिलाफ लड़ेंगे उनके साथ ऐसा होगा, कोई नई बात नहीं है, जीत सच की ही होगी। सभी बुद्धिजीवी और राजनैतिक लोग हैरान है कि 2 दिन बाद रिटायर होने वाले CEC ज्योति ने आप विधायकों की सदस्यता रद्द करने का फैसला किस दबाव में लिया?
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Dainik Jhrokha
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