गोदी मीडिया के "अच्छे दिन " की क्या यही है सौगात? - संजीव सिंह 'आप ' - DAINIK JHROKHA

Breaking

Post Top Ad

Post Top Ad

Saturday, August 11, 2018

गोदी मीडिया के "अच्छे दिन " की क्या यही है सौगात? - संजीव सिंह 'आप '

गोदी मीडिया के अच्छे दिन  की क्या यही है सौगात - संजीव सिंह 'आप '
गोदी मीडिया के अच्छे दिन  की क्या यही है सौगात - संजीव सिंह 'आप '



आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल प्रांत अध्यक्ष श्री संजीव सिंह ने मीडिया पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि राम मंदिर, लव जेहाद, घर वापसी, गो मांस- गो रक्षक , सहिष्णुता - असहिष्णुता,जे.एन.यू.,भारत माता की जय - वंदेमातरम, कश्मीर,सर्जिकल स्ट्राइक,अजान- नमाज़ , तीन तलाक़,नोटबंदी, NRC,चार सालो में व्यर्थ की बातों को मुद्दा बनाकर जनता की बुनियादी जरूरतों और मुद्दों से " गोदी मीडिया " दूर रही या बुद्धों बक्सो के मुरीदों को दूर कर दिया?


कभी कभी सोचता हूँ और आप भी सोचियेगा - संजीव 


कभी इस मीडिया ने सरकारी शिक्षा के गिरते स्तर पर , गांवो में आज भी होते बाल विवाह,सङक पर भीख मांगते बच्चों, गांवो तथा शहरों में गंदे नालों ये सीवरो के बीच कूङे की तरह रहने वाले दलितों व वंचित समाज के लोग ,गांवो से भारी संख्या में रोजगार के लिए पलायन होते नौजवानों पर, किसान की बढ़ती आत्महत्याओ पर , बेरोजगारी की मार झेलते रोजगार मांगते नौजवानों पर जानलेवा लाठीचार्ज पर,कुपोषण से मरते बच्चों पर,उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त नौजवानों के बेरोजगारी का मजाक पकौङा,पंचर,पान विक्रेता शास्त्र दर्शन पर।

' भगवान शिव ' की आस्था को बेचते ' मोदी- योगी '? - संजीव सिंह AAP


विगत चार सालों में गोदी मीडिया के किसी चैनल के स्टूडियो में उपरोक्त मुद्दों पर गंभीर बहस या चीख चिल्लाकर किसी ऐंकर को इन मुद्दों पर आवाज उठाते हुए या इन मुद्दों पर दर्द में ही सही घङियाली आँसू बहाते नहीं देखा ....? क्योंकि यह मीडिया बङी चालाकी से अपने धनपशु आका के इशारे पर इन मुद्दों पर चर्चा न कर देश को भरमाने में सफल रही। जिसके आङ में बङे बङे खेल होते गये और आम जनमानस को पता तक नहीं या जनता सत्ता रचित खेल का दर्शक समूह बन चुका है...?

चाटुकारिता की होङ, तेज निकलते हुए चैनल, आकाओ के प्रशस्ति पत्र प्राप्त करते पत्रकारों के हाथ में मजबूत कलम नहीं " मजबूर कलम " हो गयी जो सच्चाईयों का कत्ल प्रतिदिन कर रही है, क्योंकि पत्रकारिता का बदला रूप पक्षकारिता हो चुका है। क्योंकि एजेंडा अब जनता हो गयी है जनता के लिए एजेंडा इस मीडिया के पास नहीं रह गया है, धंधा है इसलिए मंदा कैसे हो...?

सरकार या सत्ता पक्ष के स्वास्थ्यवर्धक फेंकी हुई हड्डियों पर हर बङे मौके पर लपलपाती चीभ से चाटते हुए पत्रकारों ,ऐंकरो ने गिरगिटों को भी रंग बदलने में तथा बॉलीवुड के कलाकारों की अदाकारी को भी पीछे छोङ दिया है।

संसद में उठाया शिक्षामित्रों का मुद्दा, उत्तराखंड जैसे प्रावधान उत्तर प्रदेश में क्यों लागू नही - संजय सिंह


क्योंकि कैमरा दर्शन में अब रोटी- कपङा-मकान नहीं, पत्रकारों के आंखो में विजन नहीं क्योकिं उनकी आँखे चैनलों पर चलने वाले धार्मिक पाखंडो के मोतियाबिंद से धुँधला गयी है। क्योंकि नशाखोरी करता बचपन,मजबूरी, लाचारी या जबरन वेश्यावृत्ति करती बच्चियाँ, बेरोजगारी के धक्के खाते युवा,छोटे छोटे कर्जे के कारण आत्महत्या करता किसान, बदहवास मुल्क में चर्चा लायक नहीं बचा क्योंकि ये सब T.R.P.( टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट) नहीं देते।

क्योंकि " गोदी मीडिया " ने खबरों का रूख बदल दिया है ! कभी खबरें आम आवाम को बढ़ती चिंताओ से सावधान कराती थी ,बुराईयों से लङने का साहस देतीं थी, ख़बरें गलत को गलत और सही को सही कहने का एहसास कराती थी लेकिन जब खबरें बाजारू हो जाय तो कहना उचित होगा कि " सत्ता की रखैल " हो गयी है। ऐंकर अब "दलाल और रिपोर्टर भाङ" हो गये है और तभी चैनलों पर शिष्टाचार गायब हो रहा है। जहाँ कैमरे के सामने कथित प्रबुद्ध धार्मिक पाखंडो की आङ में हाथापाई मार पीट पर आ गये है।जहाँ कहीं न कहीं सत्ता के इशारे पर दलाली करता गोदी मीडिया ख़ुश हो रही है इस अंधी कामयाबी से कि चलो तीर निशाने पर लगा है।

ब्रेकिंग न्यूज, फटाफट खबरें, अब तक सबसे तेज बहुत कुछ तेजी से तोङ चुका है, प्राइम टाइम,हल्ला बोल, सीटी बजाओ, मास्टर स्ट्रोक में न कुछ प्राइम है और नहीं अब मास्टर बच पाया। क्योंकि ऐंकर, रिपोर्टर सत्ता की हनुमंत चालीसा गा रहे है।

टी.वी. डिबेट अब तपेदिक बीमारी हो गयी है,जहाँ रोटी की चर्चा सीधी बात,गरीबी ज्योतिष शास्त्र से दूर होती है, चीख का सौदा होता है,दर्द की बोली लगती है, राष्ट्रवाद का बाजार सजाया जाता है।

क्योंकि जमीर को जमीन में दफनाया जा रहा है, इंसानियत हैवानियत की तरफ बढ़ चुकी है,TRP से नफरत का बाजार तय हो रहा है,दाढ़ी से आतंक- मूँछों में जाति, कपङो में धर्म और खाने में अधर्म देखा जा रहा है।

आम आदमी पार्टी की जन अधिकार पद यात्रा से राजनितिक दलों में हड़कंप


पाखंड- धूर्तता और भगोङो के बीच की चर्चा से पूरे दिन की सच्ची खबर गायब हो जाती है।मंदिरों के घंटों में झोपङी की आवाज दब जाती है,मस्जिद के अजान की शोर में गुरूबत की चीखो को दबा दिया जाता है, शनि और राहू के पराभव में गरीबी का हल नहीं दिखता।

न्याय के नाम पर अन्याय का यह बाजारू धंधा तब तक करता रहेगा जब तक यह " गोदी मीडिया " धनपशुओ के धन पर पलता रहेगा। पत्रकारिता या पक्षकारिता करने वालों का यह समूह लूटरो का बङा गैंग बन चुका है। जो प्रतिदिन सुबह शाम देश की बौद्धिकी को लूट रहे है।अब मिट्टी की सच्चाई छोङ हवा में उङ चुके है,अपने कर्तव्यों से कब का मुङ चुके है। क्योंकि दुःख के साथ कह रहा हूँ कि लोकतंत्र का चौथा खंम्भा अब गिर चुका है।

" ज़रूरी नहीं कि जिनमें सांसे नहीं वो ही मुर्दा हैं...!
जिनमें इंसानियत नहीं वो भी तो मुर्दा ही है .......! "

संजीव सिंह 
आम आदमी पार्टी 

No comments:

Post a Comment

Thanks For Visit my site

Post Top Ad