बनारस के लोग लाशे गिन रहे और साहेब कर नाटक के लिये सीटें - संजीव सिंह AAP - DAINIK JHROKHA

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Friday, May 18, 2018

बनारस के लोग लाशे गिन रहे और साहेब कर नाटक के लिये सीटें - संजीव सिंह AAP




बनारस के लोग लाशे गिन रहे हैं और साहेब कर नाटक के लिये सीटें - संजीव सिंह AAP


वाराणसी : पुल हादसे पर आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश नेता व पूर्वांचल प्रान्त अध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा इस बात का एहसास शायद सत्ता के मद में मस्त लोग न करें और करें भी क्यों क्योंकि जो कुछ कथित विकास का खेल बनारस में सत्ता से लेकर विध्वंस तक देख रहे है। 



उसके जनक तो " महामानव " साहेब ही है! आज बनारस का कोई अपना जनप्रतिनिधि होता जो देश के शीर्षस्थ सत्ता पर होते हुए चाहे कुछ भी होता दुख की इस विशद घङी में अपने बनारसियो के साथ खङा होता न कि सत्ता जुगाड़ के जश्न में शामिल होता? क्योकि मरने वाला कोई गुजराती सेठ या व्यापारी या सत्ताधारी नेता थोङी था वह बनारसी और आसपास का था। सत्ता के मितरो से सवाल यदि आज की घटना बनारस के जगह बङोदरा में हुई होती तो क्या साहेब इसी तरह सत्ता जुगाड़ में जश्न मनाते दिखते ? सोचियेगा जवाब तो नहीं दे पायेंगे जानता हूँ। 

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उन्होंने कहा कि जहाँ इतनी बङे घटना में जिलाधिकारी वाराणसी श्री योगेश्वर राम मिश्र के लखनऊ स्थित आवास पर भंडारा चल रहा था और सारा महकमा भंडारे के जश्न में डूबा था। घटना के चार घंटे बाद स्वयं जिलाधिकारी बनारस का आगमन हुआ। दुर्घटना स्थल पर बङे क्रेन नहीं जब इतना बङा कार्य चल रहा था तो क्या किसी हादसे के इंतजार में बङे क्रेन या जीवन रक्षक उपकरण को लाये जाने का इंतजार जिला प्रशासन कर रहा था? यदि समय पर ये सब होता तो कुछ लोगों को बचाया जा सकता था अफसोस ऐसा कुछ भी नहीं था। 



श्री सिंह ने कहा बहुत सुखद खबर यही है कि कोई आवाज न उठाये इसलिये घटना में मरे हुए लोगों की पाँच लाख की बोली लगा दी गई,एकाक दिन बाद एक- दो अधिकारी, इंजीनियर ,ठेकेदार पर दिखावटी कारवाई होगी फिर वही ढाक के तीन पात। क्योंकि हम बनारसियो या हिन्दुस्तानियों को भूलने की अच्छी बीमारी भी है फिर चुनाव आ जायेगा दलो के दलाल बनकर जिन्दाबाद तो हिन्दू-मुसलमान,अगङा पिछङा जिन्दाबाद-मुर्दाबाद करना है।घटनाओं का क्या ये तो होने के लिये ही होती है।

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यदि योगी-मोदी सरकार में साहस है तो जो जान की कीमत उनकी या उनके लोगों की है तो उसी तरह इन मरे हुए लोगों के दोषियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर न्याय करें अन्यथा सब अच्छे दिनों के ही साथी ही माने जायेंगे।


( आखिर हमारे देश में क्या आम आदमी के जान की कीमत कुत्ते,बिल्ली की तरह है और नेता,बङा व्यापारी या नौकरशाह के ही जान की सम्मानित कीमत है क्या ?)

संजीव सिंह ने कहा आज के घटना ने मन को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है कि कैसे लोगों की तङप तङप कर जान चली गयी और सङक पर खङा जनमानस हाथ मसलता रह गया। हे परमेश्वर मृतकों की आत्मा को शांति तथा परिजनों को अदम्य साहस और धैर्य देना इस कष्ट को सहने के लिये।


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