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| रवीश कुमार |
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने गोदी मीडिया के चाटुकार पत्रकारों पर निशाना साधते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि जुनूनी लोगों को कोई बांध नहीं सकता। निरंजन टाकले ने जनरल बोगी में बैठकर 14000 किमी से अधिक की रेल यात्रा की ताकि वे भारत को समझ सकें। टीवी की पत्रकारिता में देखा है, लोग फोकट की स्टोरी करके राजनीतिक संपादक बन जाते हैं । उनके पूरे जीवन में ऐसी एक स्टोरी नहीं होगी। संसद भवन से दो बाइट भेज कर और चार लाइन लिखकर एडिटरी पाने वालों को निरंजन से सीखना चाहिए।
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निरंजन टाकले से एक बार मिला हूं, तब बिल्कुल पता नहीं था कि मेरे सामने कोई कमाल का शख्स बैठा है। बातचीत भी हुई, खाना भी खाया लेकिन इस शख़्स को जाना कुछ महीने बाद जब कारवान में जज लोया की स्टोरी हुई। आप चाटुकारिता को चालाकी से पर्दा डालकर दूसरों को सुनाने वाले ऐसे कितने संपादकों ने जज लोया की स्टोरी ट्विट की होगी।
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ख़ैर, ये सब चलता रहेगा। पर हम सब के ब्रांड बनने या बना दिए जाने के कुचक्र में कोई निरंजन भी है जो ख़ुद को पत्रकार बना रहा है। नवोदित पत्रकारों को पढ़ना चाहिए। पुराने पत्रकार बकरीवाद में डूब चुके हैं। वे दो चार मंत्रियों को भी जानते हैं इसलिए वे सुरक्षित महसूस करते हैं। आप पढ़िए।कमेंट में लिंक दिया है। दि hoot वेबसाइट पर ये स्टोरी मिली है।

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