किसान कंगाल मजदूर बेहाल बीजेपी के यार मालामाल 3 साल जुमला सरकार - DAINIK JHROKHA

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Saturday, May 27, 2017

किसान कंगाल मजदूर बेहाल बीजेपी के यार मालामाल 3 साल जुमला सरकार

किसान ,रोजगार , आतकवाद ,कानून ब्यवस्था पर विफल रही मोदी सरकार 



भारतीय जनता पार्टी की NDA सरकार की तीन साल पूरा होने पर सरकार खुशिया मना रही है। सरकार की सफलता की प्रचार प्रसार कर रही है। आज देश के सभी समाचार पत्रों के मुख्य पृष्ठ पर सरकार का ऐड छपा हुआ था। सभी न्यूज चैनलों पर सरकार का प्रोग्राम लाइव टेलीकास्ट चल रहा था। लेकिन सरकार के विफलताओ पर कोई बात करना नहीं चाहता था। आज प्रेस् ट्रस्ट ऑफ़ इण्डिया के वेबसाइट पर सरकार के सफलता के साथ विफलता भी जारी हुवा था लेकिन उसे एक घंटे के अंदर ही हटा दिया गया। इस सबके उलट जानकारों और विरोधियो का मानना है कि कुछ मुद्दों को छोड़ मोदी सरकार असफल रही है 


इस समय देश के किसानो की हालत किसी से छिपा है देश का किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है। मोदी सरकार अपने चुनावी वादों से पलट गयी और किसानो के लागत की दोगुना मूल्य अदा करने के वादा से सुप्रीम कोर्ट में मुकर गयी। अब भारतीय जनता पार्टी के द्वारा 2022 तक किसानो की आय सुधरने की बात कर रही है। 
दिन पर दिन किसानो की आत्महत्या की संख्या में बृद्धि हो रही है


राष्ट्रीय अपराध लेखा के आँकड़ों के अनुसार भारत भर में 2008 में 16116 किसानों ने आत्महत्याएँ की थी। 2009 में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या में 1672 की वृद्धि हुई। 2009 के दौरान 17368 किसानों द्वारा आत्महत्या की आधिकारिक रपट दर्ज हुई। राष्ट्रीय अपराध लेखा अनुसार 1994 से 2011 के बीच 17 वर्ष में 7 लाख, 50 हजार, 860 किसानों ने आत्महत्या की है। भारत के महाराष्ट्र में अब तक आत्महत्याओं का आँकड़ा 50 हजार 860 तक पहुँच चुका है। 2011 में मराठवाड़ा में 435, विदर्भ में 226 और खानदेश (जलगाँव क्षेत्र) में 133 किसानों ने आत्महत्याएँ की है। आंकड़े बताते हैं कि 2004 के पश्चात् स्थिति बद से बदतर होती चली गई। अगर 2015 के ही आकड़ो को माने तो 12602 किसानो ने आत्महत्या की है।



देश के पुरे किसानो का कर्ज 12.6 लाख करोड़ है जिसे माफ़ करने की लिए केंद्र सरकार असमर्थ है जबकि सिर्फ बाबा रामदेव को 2.98 केंद्र सरकार सिर्फ सब्सिडी के रूप में दे दिया। ऐसे कई उधोग पतियों को मुहैया कराई है लेकिन किसान का कर्ज माफ़ करने में असमर्थ है। भारत के ज्यादातर छोटे किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं | कर्ज वापस करने के लिए यह जरुरी है कि फसल अच्छी हो। हमारे देश में सिंचाई की सुविधा बहुत कम किसानों को उपलब्ध है। ज्यादातर किसान खेती के लिए वर्षा पर निर्भर रहते हैं। अब ऐसे में यदि मानसून ठीक से न बरसे तो फसल पूरी तरह बरबाद हो जाती है। किसान की सारी मेहनत बरबाद हो जाती है। पुरे साल भर खाने के लिए भी कुछ नहीं रहता, साथ में कर्ज चुकाने का बोझ अलग, मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्तिथियाँ किसानों के लिए समस्याओं के एक चक्र की शुरुआत करती हैं। ऐसी परिस्थितियों में वे बैंकों, महाजनों, बिचौलियों आदि के चक्र में फँस जाते हैं। कई किसान कर्ज के दबाव को सह नहीं पाते और आत्महत्या कर लेते हैं। इसपर संज्ञान लेना चाहिए। 


देश सीमाओं पर सेना हाल भी कुछ ठीक नहीं है आये दिन पाकिस्तान द्वारा सीजफायर उलंघन होता रहता है और इसके चलते देश के वीर सपुत शहीद होते रहते है। इसके ऊपर भी केंद्र की कुछ खास कार्यवाही नहीं दिखती है। एनडीए सरकार के कानून ब्यवस्था पर बड़े अस्तर सवाल खड़े हुए है।  इस समय उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है लेकिन वहा आये दिन दंगा ,हत्या ,डैकेती , बलात्कार ,चोरी की घटनाये बढ़ती जा रही है। 


एनडीए की 3 साल सरकार पर आम आदमी पार्टी ने प्रेस कांफ्रेंस कर सवाल उठाया। अम्बानी, अम्बानी, बाबा रामदेव  पर सवाल उठाया। इस वीडियो को यह निचे देख सकते है 

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